Monday, January 21, 2019

मुसलमाँ और हिन्दू की जान ...


मुसलमाँ और हिन्दू की जान 
कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान 
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

मिरे बचपन का हिन्दोस्तान 
बंगलादेश पाकिस्तान 
मिरी आशा मिरा अरमान 
वो पूरा पूरा हिन्दोस्तान 
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

वो मेरा बचपन वो स्कूल 
वो कच्ची सड़कें उड़ती धूल 
लहकते बाग़ महकते फूल 
वो मेरे खेत मिरे खलियान  
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

वो उर्दू ग़ज़लें हिन्दी गीत 
कहीं वो प्यार कहीं वो प्रीत 
पहाड़ी झरनों के संगीत 
देहाती लहरा पुर्बी तान
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

जहाँ के कृष्ण जहाँ के राम 
जहाँ की शाम सलोनी शाम 
जहाँ की सुब्ह बनारस धाम 
जहाँ भगवान करें अश्नान 
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

जहाँ थे 'तुलसी' और 'कबीर' 
'जायसी' जैसे पीर फ़क़ीर 
जहाँ थे 'मोमिन' 'ग़ालिब' 'मीर' 
जहाँ थे 'रहमन' और 'रसखा़न' 
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

वो मेरे पुरखों की जागीर 
कराची लाहौर कश्मीर 
वो बिल्कुल शेर की सी तस्वीर 
वो पूरा पूरा हिन्दोस्तान 
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ


मुसलमाँ और हिन्दू की जान 
कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ 

By अजमल सुल्तानपूरी

Monday, April 24, 2017

इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं......

इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं
जिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं

गधे हँस रहे, आदमी रो रहा है
हिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है

जवानी का आलम गधों के लिये है
ये रसिया, ये बालम गधों के लिये है

ये दिल्ली, ये पालम गधों के लिये है
ये संसार सालम गधों के लिये है

पिलाए जा साकी, पिलाए जा डट के
तू विहस्की के मटके पै मटके पै मटके

मैं दुनियां को अब भूलना चाहता हूं
गधों की तरह झूमना चाहता हूं

घोडों को मिलती नहीं घास देखो
गधे खा रहे हैं च्यवनप्राश देखो

यहाँ आदमी की कहाँ कब बनी है
ये दुनियां गधों के लिये ही बनी है

जो गलियों में डोले वो कच्चा गधा है
जो कोठे पे बोले वो सच्चा गधा है

जो खेतों में दीखे वो फसली गधा है
जो माइक पे चीखे वो असली गधा है

मैं क्या बक गया हूं, ये क्या कह गया हूं
नशे की पिनक में कहां बह गया हूं

मुझे माफ करना मैं भटका हुआ था
वो ठर्रा था, भीतर जो अटका हुआ था

ओम प्रकाश ‘आदित्य’

*****

Saturday, August 2, 2014

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए...

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
---------------------- दुष्यंत कुमार 

Thursday, January 2, 2014

Tere dwaar khada bhagwaan


http://www.youtube.com/watch?v=b88D6z9N3eg

Tere dwaar khada bhagwaan, ho
 Tere dwaar khada bhagwaan
 Bhagat bhar de re jholi
 Tere dwaar khada bhagwaan
 Bhagat bhar de re jholi

Tera hoga bada ehsaan
 Ke joog joog teri rahegi shaan
 Bhagat bhar de re jholi
 Tere dwaar khada bhagwaan
 Bhagat bhar de re jholi
 Oh, bhagat bhar de re jholi


 Dol uthi hai saari dharti
 Dekh re dola gagan hai saara
 Dol uthi hai saari dharti
 Dekh re dola gagan hai saara
Bheekh maangne aaya tere ghar
 Jagat ka paalanhaara re
 Jagat ka paalanhaara
 Main aaj tera mehmaan
 Kar le re mujhse zara pehchaan
 Bhagat bhar de re jholi
 Tere dwaar khada bhagwaan
 Bhagat bhar de re jholi
 Oh, bhagat bhar de re jholi


 Aaj luta de re sarvas apna
 Maan le kehna mera
 Aaj luta de re sarvas apna
 Maan le kehna mera
Mit jaayega pal mein tera
 Janam janam ka phera re
 Janam janam ka phera
 Tu chhod shakal abhi maan
 Amar kar le re tu apna daan
 Bhagat bhar de re jholi
 Tere dwaar khada bhagwaan
 Bhagat bhar de re jholi

Sunday, December 29, 2013

इंसान का इंसान से हो भाईचारा...


http://www.youtube.com/watch?v=entC0cS75J8

http://www.youtube.com/watch?v=TmCFp6MKleE

इंसान का इंसान से हो भाईचारा
यही पैगाम हमारा
यही पैगाम हमारा

नये जगत में हुआ पुराना ऊँच-नीच का किस्सा
सबको मिले मेहनत के मुताबिक अपना-अपना हिस्सा
सबके लिए सुख का बराबर हो बँटवारा
यही पैगाम हमारा
यही पैगाम हमारा

हरेक महल से कहो की झोपड़ियों में दिये जलाये
छोटों और बड़ों में अब कोई फ़र्क नहीं रह जाये
इस धरती पर हो प्यार का घर-घर उजियारा
यही पैगाम हमारा
यही पैगाम हमारा

इंसान का इंसान से हो भाईचारा
यही पैगाम हमारा
यही पैगाम हमारा
 

Sunday, December 26, 2010

हनुमान-कालनेमी संवाद...

राम-सिया-राम सिया-राम सिया-राम
मैं तो राम ही राम पुकारूँ....

कित्थे आवे कितको जावे
बाबा ने सब बेरा रे
जानो हे बड़ी दूर बटेयू
कर ले रैन-बसेरा रे

तु क्यूँ चिंता करता है
करना है सो राम करे
ऎसी भगवान की मरजी है
तु थोड़ा विश्राम करे
राम-लखन के जीवन में कभी
होगा नहीं अंधेरा रे
जानो हे बड़ी दूर बटेयू
कर ले रैन-बसेरा रे

तुझे भूख-प्यास न लागे
मैं ऎसा मंत्र बता दुँगा
तुझे जिस पर्वत पर जाणा
मैं एक पल में पहुँचा दुँगा
स्नान-ध्यान करके तु आजा
तुझे बना लूँ चेला रे
जानो हे बड़ी दूर बटेयू
कर ले रैन-बसेरा रे

श्री राम जय राम जय-जय राम...

श्री राम जय राम जय-जय राम
शेष न कोई आशा हो जब
चारों ओर निराशा हो जब
तब फ़िर बोलो येही नाम
श्री राम जय राम जय-जय राम

जीते-जी तब सबसे नाता
इसके बाद न कोई निभाता
अंत समय में आता काम
श्री राम जय राम जय-जय राम

सार गुरू उपदेश का है ये
जीवन-धन सौमित्र का है ये
रे-मन बन-जा राम गुलाम
श्री राम जय राम जय-जय राम

तेरे सिर पर सीता-राम...

तेरे सिर पर सीता-राम
फ़िकर फ़िर काहे की
तेरे बिगड़े बनेगें काम
फ़िकर फ़िर काहे की

पितु रघुवर श्री जानकी मैया
फ़िर क्यों परेशान हो भैया
तेरे हरेंगें कष्ट तमाम
फ़िकर फ़िर काहे की

जो जन राम-कथा सत-संगी
उनके सहाय श्री बजरंगी
अतुलित-बल के धाम
फ़िकर फ़िर काहे की

अगर प्रभु मनमानी करेंगें
नहीं सरणागत पीर हरेंगें
होगा विरद बदनाम
फ़िकर फ़िर काहे की

अब सौमित्र न आह भरो तुम
नहीं व्यर्थ परवाह करो तुम
रटो राम का नाम
फ़िकर फ़िर काहे की

कृष्ण जिनका नाम है....

कृष्ण जिनका नाम है
गोकुल जिनका धाम है
ऎसे श्री भगवान को
बारंबार प्रणाम है

यशोदा जिनकी मैया है
नंद जी बापैया है
ऎसे श्री गोपाल को
बारंबार प्रणाम है

लूट-लूट दधि माखन खायो
ग्वाल-बाल संग धेनु चरायो
ऎसे लीला-धाम को
बारंबार प्रणाम है

ध्रुपद सुता की लाज बचायो
गजेन्द्र-गज को फ़ंद छुड़ायो
ऎसे किरपा-धाम को
बारंबार प्रणाम है

Thursday, December 31, 2009

कब याद में तेरा साथ नहीं...



कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं
सद-शुक्र*1 के अपनी रातों में, अब हिज्र*2 की कोई रात नहीं
मैदाने-वफ़ा दरबार नहीं, यां नामो-नसब*3 की पूछ कहाँ
आशिक़ तो किसी का नाम नहीं, कुछ इश्‍क़ किसी की ज़ात नहीं
जिस धज*4 से कोई मक्‍तल*5 में गया, वो शान सलामत रहती है
ये जान तो आनी-जानी है, इस जां की तो कोई बात नहीं
गर बाज़ी इश्‍क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्‍या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं
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*1 सौ बार शुक्रिया
*2 विरह
*3 नाम और वंश
*4 ठसक
*5 फाँसी या बलि देने की जगह
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http://radiovani.blogspot.com/2009/08/kab-yaad-me-tera-saath-nahin-sung-by.html
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Friday, November 27, 2009

राम सिया राम सिया राम जय जय राम....




हो, मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी

राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २


हो, होइहै वही जो राम रचि राखा
को करि तरक बढ़ावें साखा

राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २


हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी

राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २


हो, जेहिकें जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू

राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २


हो, जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरति देखी  तिन तैसी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २


हो, रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
राम सिया राम सिया राम जय जय राम -


हो, हरि अनन्त हरिकथा अनन्ता
कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम

Tuesday, December 25, 2007

धन्य है जिदंगी यह हमारी...

गायत्री परिवार का यह सुंदर भजन मुझे बहुत प्रिय है । आप भी इसे नीचे दी गई लिंक पर सुन सकतें हैं । लिंक पर जाकर गाने पर क्लिक करें । साथ में नीचे भजन के बोल भी दिये गये हैं । धन्यवाद...

http://multimedia.awgp.org/?mission_vision/Songs/bhaavsuman



धन्य है जिदंगी यह हमारी नाथ पाकर सहारा तुम्हारा
हे प्रभो द्बार पर हम खड़े हैं शेष जीवन है सारा तुम्हारा

हर तरफ़ था भयंकर समंदर जीर्ण थी नाथ जीवन की नैया
क्या पता यह कहाँ डूब जाती जो ना मिलता किनारा तुम्हारा
धन्य है जिदंगी...

कामना है तुम्हें जिदंगी में सुन सकें जागते और सोते
हर निमिष बाँसुरी के सुरों सा पा सकें हम इशारा तुम्हारा
धन्य है जिदंगी...

तेज तुफ़ान में आँधियों में पाँव जब ये कभी डगमगायें
थाम ले हाथ बढ़कर हमारा हाथ भगवन दुबारा तुम्हारा
धन्य है जिदंगी...

पुत्र सा प्यार पाते रहें हम पाँव निर्भय बढ़ाते रहें हम
जन्म-जन्मांतरों तक रहे ये नाथ रिश्ता हमारा तुम्हारा
धन्य है जिदंगी...

बुद्धी वह दो की जो भी मिला है लोकहित में उसे हम लगायें
ताकी भगवन हमारे लिये भी फ़िर खुला हो दुआरा तुम्हारा

धन्य है जिदंगी यह हमारी नाथ पाकर सहारा तुम्हारा
हे प्रभो द्बार पर हम खड़े हैं शेष जीवन है सारा तुम्हारा

धन्य है जिदंगी यह हमारी नाथ पाकर सहारा तुम्हारा
शेष जीवन है सारा तुम्हारा
नाथ पाकर सहारा तुम्हारा....

तुम बेसहरा हो तो...

मुझे फ़िल्म अनुरोध का गाना "तुम बेसहारा हो तो..." बहुत पसंद है । आप इस गाने को नीचे दी गई लिकं से सुन सकते हैं । लिंक पर जाकर गीत select करके play बटन पर click करें । साथ में गाने के बोल भी दिये गये हैं ।

http://www.youtube.com/watch?v=0vcZxELBvZ0

तुम बेसहरा हो तो किसी का सहारा बनो
तुम को अपने आप ही सहारा मिल जायेगा
कश्ती कोई डूबती पहुँचा दो किनारे पे
तुम को अपने आप ही किनारा मिल जायेगा
तुम बेसहारा हो तो ...

हँस कर ज़िन्दा रहना पड़ता है
अपना दुःख खुद सहना पड़ता है
रस्ता चाहे कितना लम्बा हो
दरिया को तो बहना पड़ता है
तुम हो एक अकेले तो रुक मत जाओ चल निकलो
रस्ते में कोई साथी तुम्हारा मिल जायेगा
तुम बेसहारा हो तो ...

जीवन तो एक जैसा होता है
कोई हँसता कोई रोता है
सब्र से जीना आसाँ होता है
फ़िक्र से जीना मुश्किल होता है
थोड़े फूल हैं काँटे हैं जो तक़दीर ने बाँटे हैं
हम को इन में से हिस्सा हमारा मिल जायेगा
तुम बेसहारा हो तो ...

न बस्ती में न वीरानों में
न खेतों में न खलिहानों में
न मिलता है प्यार बज़ारों में
न बिकता है चैन दुकानों में
ढूँढ रहे हो तुम जिस को
उस को बाहर मत ढूँढो
मन के अन्दर ढूँढो प्रीतम प्यारा मिल जायेगा
तुम बेसहारा हो तो ...

Monday, June 11, 2007

हमारी ही मुठ्ठी में...

प्रहार फ़िल्म का यह गीत निराशा के क्षणों में मुझे बहुत प्रेरणा देता है । नीचे दिये गये लिंक से आप भी इसे सुन सकतें हैं । लिंक पर जाकर गीत select करके play बटन पर click करें ।

http://www.youtube.com/watch?v=MUmPjIxdAmE

साथ ही इस गीत के बोल हिन्दी में नीचे प्रस्तुत किये गये हैं । आशा है आपको पसंद आयेगें.......धन्यवाद ।

हमारी ही मुठ्ठी में आकाश सारा
जब भी खुलेगी चमकेगा तारा
कभी ना ढले जो, वो ही सितारा
दिशा जिस से पहचाने संसार सारा

हथेली पे रेखायें हैं सब अधूरी
किस ने लिखीं हैं नहीं जानना है
सुलझाने उनको ना आयेगा कोई
समझना है उनको ये अपना करम है

अपने करम से दिखाना है सब को
खुद का पनपना, उभरना है खुद को

अंधेरा मिटाये जो नन्हाँ शरारा
दिशा जिस से.....


हमारे पीछे कोई आये ना आये
हमें ही तो पहले पहुँचना वहाँ है

जिन पर है चलना नई पीढ़ियों को
उन ही रास्तों को बनाना हमें है
जो भी साथ आये उन्हें साथ ले ले
अगर ना कोई साथ दे तो अकेले
सुलगा के खुद को मिटा दे अंधेरा
दिशा जिस से.....