Friday, January 30, 2026

इतना मलाल थोड़ी है...परवीन शाकिर

मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है,
ये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है |


बस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोग,
यहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है |


परों को काट दिया है उड़ान से पहले,
ये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी है |


मज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहें,
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है |


लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले,
ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है |


Sunday, January 25, 2026

यह क्या हो गया मुझे....सलमान अख़्तर

जीना अज़ाब* क्यूँ है, यह क्या हो गया मुझे 
किस शख्स की लगी है भला बददुआ मुझे  

निकले थे दोनों भेस बदलकर तो क्या अजब 
मैं ढूंढ़ता खुदा को फिरा और खुदा मुझे 

इस घर के कोने कोने में यादों के भूत हैं 
अलमारियाँ न खोल बहुत मत डरा मुझे 

पूजेंगे मुझको गांव के सब लोग एक दिन 
मैं एक पुराना पेड़ हूँ तू मत गिरा मुझे 

यह कहके मैंने रखा है हर आईने का दिल 
अगले जनम में रूप मिलेगा नया मुझे 

तू मुतमइन** नहीं तो मुझे कब है ऐतराज़ 
मिट्टी को फिरसे गूँथ मेरी फिर बना मुझे 

*कष्ट 
**संतुष्ट 

Sunday, January 18, 2026

अब तो ये भी याद नहीं है...सलमान अख़्तर

हमको उससे शिकवा क्या था अब तो ये भी याद नहीं है 
कैसे उसने दिल तोड़ा था अब तो ये भी याद नहीं है 

आज तो उसकी हर कमज़ोरी साफ दिखाई देती है 
पहले उसमें क्या देखा था अब तो ये भी याद नहीं है 

उसको हम पहचान गए हैं अंदर क्या है जान गए हैं
फिर भी धोखा क्यूँ खाया था अब तो ये भी याद नहीं है 

ज़ाम था, दिल था, या फिर उनसे किया कोई एक वादा था 
रात नशें मे क्या टूटा था अब तो यह भी याद नहीं है