Sunday, January 25, 2026

यह क्या हो गया मुझे....सलमान अख़्तर

जीना अज़ाब* क्यूँ है, यह क्या हो गया मुझे 
किस शख्स की लगी है भला बददुआ मुझे  

निकले थे दोनों भेस बदलकर तो क्या अजब 
मैं ढूंढ़ता खुदा को फिरा और खुदा मुझे 

इस घर के कोने कोने में यादों के भूत हैं 
अलमारियाँ न खोल बहुत मत डरा मुझे 

पूजेंगे मुझको गांव के सब लोग एक दिन 
मैं एक पुराना पेड़ हूँ तू मत गिरा मुझे 

यह कहके मैंने रखा है हर आईने का दिल 
अगले जनम में रूप मिलेगा नया मुझे 

तू मुतमइन** नहीं तो मुझे कब है ऐतराज़ 
मिट्टी को फिरसे गूँथ मेरी फिर बना मुझे 

*कष्ट 
**संतुष्ट 

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