Saturday, April 18, 2026

जो बात छुपाई है सबसे...सलमान अख़्तर

जो बात छुपाई है सबसे
वो उनसे छुपानी मुश्किल है
बाहर की कहानी आसाँ है
अंदर की कहानी मुश्किल है

जब उनसे मिलने जाते हैं
मिलते ही बहुत पछताते हैं
हर बात पे ऐसा लगता है
यह बात बतानी मुश्किल है

आया न वतन क्यूँ हमको रास
किस जुर्म पर पाया है वनवास
किस मोड़ पे सीता छूट गई
यह राम कहानी मुश्किल है


Thursday, April 16, 2026

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ ..By जावेद अख़्तर

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ 
मैं तनहाई के दिन आते देख रहा हूँ 

आने वाले लम्हे से दिल सहमा है
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ

कब यादो का जख्म भरे कब दाग मिटे
कितने दिन लगते है भुलाते देख रहा हूँ

उसकी आखो मे भी काजल फैला है
मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हूँ 

Thursday, April 9, 2026

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है....By राजेश रेड्डी

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है
खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है

मिरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है

न बस में ज़िंदगी उस के न क़ाबू मौत पर उस का
मगर इंसान फिर भी कब ख़ुदा होने से डरता है

अजब ये ज़िंदगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसाँ
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है

Saturday, April 4, 2026

नयी-नयी आँखें / निदा फ़ाज़ली

नयी-नयी आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है
कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन, अब घर अच्छा लगता है ।

मिलने-जुलनेवालों में तो सारे अपने जैसे हैं
जिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है ।

चाहत हो या पूजा सबके अपने-अपने साँचे हैं
जो मूरत में ढल जाये वो पैकर (चेहरा) अच्छा लगता है ।

हमने भी सोकर देखा है नये-पुराने शहरों में
जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है ।